आइए जानते हैं - चक्रवात (साइक्लोन) क्या होता है और इसकी उत्पत्ति कैसे होती है? 'अम्फान' चक्रवात कितना ख़तरनाक?



The Daily Whisperer - 'अम्फान ' एक बहुत ही ख़तरनाक  ट्राॅपिकल चक्रवाती तूफान है  जो  20 मई  को पश्चिम बंगाल के दीघा व  बांग्लादेश के हटिया और ओडिशा के तट  से  सम्भवतः दोपहर बाद  टकराएगा । 
Indian Meteorological Department के अनुसार ये तूफ़ान अब एक  'महाचक्रवात' का रूप धारण कर चुका है जो अत्यंत विनाशकारी है। 
इस चक्रवात के कारण पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बांग्लादेश में भयंकर बारिश के साथ  203 km/घंटे की अत्यंत  तीव्र गति से हवाएँ चलेंगी। 
हालाँकि स्थिति से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमें और इंडियन नेवी के बचाव दलों ने कमर कस ली है। पिछले  वर्ष बंगाल की खाड़ी में ही 'फेनी' चक्रवात   
ने जन्म लिया था जिसकी वजह से तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही आयी थी, मुख्यतः ओडिशा इससे ज्यादा प्रभावित हुआ था। 
लेकिन 'अम्फान' सुपर साइक्लोन अर्थात महा चक्रवात है इसका व्यास काफ़ी ज्यादा है और हवाएँ बहुत ही ज्यादा तीव्र हैं। इस चक्रवात को अम्फान (Amphan) नाम थाईलैंड ने दिया है। 
   चक्रवात और महाचक्रवात क्या है और कैसे बनता है? 
चक्रवात वास्तव में एक अत्यंत निम्न वायुदाब का केंद्र होता है। जिसके चारों ओर परिधि से  केंद्र की ओर चलने वाली  समवायुदाब वाली वायुराशियाँ होती हैं। 
जैसा कि हम सभी ने विज्ञान में पढ़ा भी है कि भौतिक-रासायनिक क्रियाएं हमेशा अधिक  मान से निम्न  मान की ओर होती हैं। 
(उदाहरणार्थ, उष्मा अधिक ताप से निम्न ताप की ओर बहती है।) 
उसी प्रकार जब किसी समुद्री क्षेत्र में  समुद्री सतह का तापमान   27° C - 30°C हो जाता है तो सतह के निकट की वायु भी गर्म होने लगती है और गर्म होकर ऊपर उठने लगती है, जिससे उस जगह पर एक निम्न वायुदाब का केंद्र बन जाता है। उस निम्न वायुदाब क्षेत्र (रिक्त स्थान) को भरने के लिए  चारों तरफ की अधिक वायुदाब वाली वायुराशियां  (ठंडी हवाएँ )  आगे बढ़ती हैं। 
अर्थात हवाएँ  परिधि से केंद्र की ओर बहुत ही तीव्रता से बढ़ती हैं  और कोरिएलिस - इफेक्ट के कारण हवाएँ केंद्र के चारों तरफ़ गोल-गोल अथवा चक्राकार में 
घूमने लगती हैं। 
एक चक्रवात का व्यास (Diameter) औसतन 50 से 300 किलोमीटर तक होता है और हवाओं की औसत गति  50-90 किलोमीटर प्रति घंटे होता है लेकिन कभी-कभी (महाचक्रवात की स्थिति में)  हवाएँ औसतन 120km/घंटे या उससे भी अधिक रफ्तार से चलती हैं। 
गौरतलब है कि यहां सिर्फ औसत रफ्तार की बात की गई है।  
महाचक्रवात(Super Cyclone) - जब चक्रवात का व्यास बहुत विस्तृत और उसमें चलने वाली हवाओं की रफ्तार बहुत ही ज्यादा तीव्र हो तो उसे  'महाचक्रवात' कहते हैं। 
ये अपने साथ भयंकर तबाही लाता है। 
घर की छतें कागज़ के पन्ने की तरह उड़ जाती हैं, बड़े बड़े पेड़ जड़ से उखड जाते हैं, बिजली के खंबे जमींदोज हो जाते हैं। भारी बारिश के कारण निम्न इलाकों में जल भराव हो जाता है और अत्याधिक मात्रा में प्राकृतिक बिजली गिरने के कारण भारी तबाही आती है। समुद्र में बहुत ऊंची ऊंची लहरे उठती हैं। 
'अम्फान' एक सुपर साइक्लोन है जो दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बना और उत्तर-पश्चिम की ओर अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रहा है। 

चक्रवात दो प्रकार के होते हैं -  Tropical Cyclone &  Temperate Cyclone 

Tropical Cyclone (उष्णकटिबंधीय चक्रवात) - ये चक्रवात 0° से 33.5° डिग्री उत्तरी अक्षांशों के बीच में उत्पन्न होता है। 
इन्हें दुनिया में अलग अलग नामों से जाना जाता है। जैसे कैरेबियन सागर और पूर्वी-उत्तरी अटलांटिक महासागर में Hurricane, जापान और पूर्वी चीन सागर में Typhoon, 
फिलिपीन्स में Haiyan, ऑस्ट्रेलिया में BiliBili ऊऔर भारत में चक्रवात या साइक्लोन।
Temperate Cyclone (शीतोष्ण चक्रवात) - ये चक्रवात 60° से 65° उत्तरी अक्षांश अर्थात उत्तरी ध्रुव के पास उत्पन्न होता है जहां पर तापमान अत्यंत कम होता है।
जब उत्तर-पूर्व से अत्यंत ठंडी हवाएँ दक्षिण-पश्चिम में उष्ण कटिबन्ध की तरफ बढ़ती हैं  तो शीतोष्ण चक्रवात का जन्म होता है। 
  किसी चक्रवात का नाम कैसे रखा जाता है? 🤔
WMO के अनुसार, 
सामान्यतः वर्ष के पहले चक्रवात का नाम अंग्रेजी के अक्षर A से रखा जाता है और दूसरे का B से क्रमशः। 
जैसे 2020 के पहले चक्रवात का नाम  Amphan पड़ा। 
लेकिन हिंद महासागरीय क्षेत्र के लिए साइक्लोन के नामकरण की शुरुआत सन 2000 में हुई, सन 2004 में 8 देशों भारत, म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान, ओमान, बांग्लादेश, थाइलैंड और मालदीव के बीच साइक्लोन के नामकरण (Naming) पर एक सहमति बनी बाद में इस लिस्ट में 5 और देश शामिल हुए - UAE, यमन, सऊदी अरब, ईरान और कतर। 
सहमति के अनुसार चक्रवात का नाम किसी धर्म, जाति, समुदाय, राजनीतिक पार्टी आदि के नाम पर ना होकर पूर्ण रूप से निरपेक्ष होगा। 

    IMD का सटीक अनुमान 
Indian Meteorological Department के सटीक पूर्वानुमान की वजह से ही जान-माल की हानि को अत्यधिक कम कर पाना संभव हो पाता है। 
2014 के बाद से ही भारत सरकार के कहने पर इसरो द्वारा ऐसी बहुत से मौसम - उपग्रह भेजे गए जो ऐसी किसी भी भयानक प्राकृतिक आपदा का एकदम सटीक पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। 
भारत के IMD ने कई दिन पहले ही अम्फान से संबंधित चेतावनी जारी कर दी थी। 
जिसके कारण कोस्टल इलाकों में रहने वाले लोगों, पशुओं आदि को निकाल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। नाविकों को समुद्र के आसपास जाने से रोक दिया गया है। 

आशा करते हैं कि ये ब्लॉग आपको पसंद आया होगा। 

Editor - Kaushik Dubey 
            Blog - The Daily Whisperer   #TDW














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