सावधान! क्या आपने मोबाइल खरीदने से पहले SAR चेक किया था? | SAR क्या होता है और कितना खतरनाक है हमारे लिए? | SAR Value क्या होता है?

✒️ कौशिक दुबे 


'स्मार्टफोन'  जिसे आम भाषा में लोग मोबाइल फोन भी कहते हैं, आजकल हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। ये हमारी आदत, हमारा लत बन चुका है। इसके बिना तो हम लोग जीवन की कल्पना करना भी बेमानी मानते हैं।
नौजवानों को तो छोड़िए, बच्चों को भी अब इसकी लत लग चुकी है। बच्चे भी अब गुड्डा-गुड़िया और मिट्टी के खिलौनों से कहीं ज्यादा दिलचस्पी मोबाइल फ़ोन में दिखा रहे हैं।
हालांकि इसमें बच्चों की कोई ग़लती नहीं। 
बच्चे दो साल के हुए नहीं कि माँ-बाप भी बच्चों का मन बहलाने के लिए डिजिटल हथकंडा अपनाते हैं, यूट्यूब पर A B C D और राइम्स चला देते हैं और मोबाइल हाथ में थमा कर फुर्सत हो लेते हैं। 
हमारा भी अधिकतर काम आजकल मोबाइल से ही होने लगा है - इन्टरनेट का प्रयोग , वीडियो कॉल, whatsapp, फेसबुक, गूगल मैप, नेट बैंकिंग, पढ़ाई इत्यादि करना हो तो हम स्मार्टफोन का ही प्रयोग करते हैं 

लेकिन ये मोबाइल फ़ोन अथवा स्मार्टफोन आपको और आपके बच्चों को कितना ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकता है इसका तनिक भी अंदाजा नहीं आपको। 
ये ब्लॉग मैंने उसी ख़तरे  के बारे में आगाह करने के लिए लिखा है। 

 जैसा कि हम सभी जानते हैं कि  हमारा मोबाइल फ़ोन रेडियो  सिग्नल (Radio Signal) के माध्यम से ही सूचनाओं और संदेशों का आदान-प्रदान  करता है, 
चाहे वो फ़ोन कॉल हो, वीडियो कॉल हो या इन्टरनेट। 
सूचनाओं और संदेशों को प्राप्त  (Receive) और प्रेषित  (Send) करने के लिए  क्रमशः हमारे मोबाइल फ़ोन में एक  एंटीना  होता है  जो  रिसीवर  (Reciever) का काम करता और एक ट्रांसमीटर (Transmitter) होता है जो हमारे बातचीत को इलेक्ट्रिक सिग्नल  में बदलकर  उसे रेडियो तरंगो (Radio Waves) के माध्यम से प्रेषित करने का काम करता है। 
चूंकि रेडियो वेव्स अथवा रेडियो तरंगें भी   'ऊर्जा ' का ही एक रूप हैं अतः  जब इनका ट्रांसमिशन और रिसीविंग होता है तो  कुछ रेडियो तरंगें आसपास के वातावरण में विकरित (Radiate) हो जाती हैं। जिसे आम बोलचाल की भाषा में  'रेडिएशन 'कहते हैं। 

ये रेडिएशन जब मानव शरीर में प्रवेश करता है तो इसके बहुत गंभीर परिणाम होते हैं।  ये मानव शरीर में  ब्रेन  कैंसर, तनाव-अनिद्रा  जैसे भयंकर बीमारियों का कारण बनते हैं और यहां तक कि  इसकी वजह से मानव की प्रजनन  क्षमता भी बहुत प्रभावित होती है। 
मोबाइल फ़ोन से निकलने वाले इस ख़तरनाक रेडिएशन  को मापने के लिए  विभिन्न देशों द्वारा एक  'मानक ' तय किया गया है जिसे  SAR (Specific Absorption Rate) अथवा   विशिष्ट-अवशोषण दर   कहते हैं। 

    SAR क्या होता है ? 

SAR  का फुल फॉर्म होता है Specific Absorption Rate.. 
ये एक मापदंड होता है जिसकी मदद से हम ये माप सकते हैं की किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के इस्तेमाल से कितनी मात्रा में  विद्युत चुंबकीय तरंगे (Electromagnetic Waves) विकरित हो रही हैं जो की हमारे शरीर के द्वारा अवशोषित होती हैं। इस रेट को मापने के लिए ये देखा जाता है की कितनी पॉवर (RF) हमारे कितने वजन के टिशू (Tissues) में अवशोषित हो जाती है। 
इसे वाट/किलोग्राम  (Watt/kg) में मापा जाता है। ये रेडिएशन मुख्यतः हमरे शरीर के दो हिस्सों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है एक है हमारा सर और दूसरा सिर के नीचे वाला हिस्सा यानि की धड़। सिर इसलिए क्यूंकि फ़ोन में बात करते वक़्त यही हिस्सा सबसे ज्यादा उस रेडिएशन - फील्ड के निकट होता है। 

          SAR वैल्यू  कितना महत्वपूर्ण है ? 

Literally जब हम मोबाइल खरीदने जाते हैं तो  दुकानदार से  मोबाइल के विभिन्न फ़ीचर्स के बारे में पूछते हैं जैसे मोबाइल के RAM के बारे में, एंड्रॉयड वर्जन के बारे में , ROM के बारे में और कैमरा क्वालिटी इत्यादि के बारे में सवाल करते हैं लेकिन शायद ही आजतक किसी ने मोबाइल के SAR वैल्यू के बारे में पूछा होगा या उसे चेक किया होगा ?
जबकि मोबाइल खरीदते वक्त सबसे पहले हमें मोबाइल के SAR को चेक करना चाहिए लेकिन नहीं। 
SAR वैल्यू किसी भी मोबाइल या उसके पैकेट पर बनी एक  'वैधानिक चेतावनी ' जैसी होती है ठीक उसी तरह जैसे तंबाकू - गुटखा , पान मसाला और सिगरेट के पैकेट पर  एक भयानक चित्र के साथ वैधानिक चेतावनी छपी होती है। 
लेकिन इग्नोर करना तो हमारी फितरत बन चुका है, जैसे हम  सिगरेट, गुटखा के पैकेटों पर बने वैधानिक चेतावनी  व चित्रों  को इग्नोर कर देते हैं उसी तरह मोबाइल फ़ोन के पैकेटों  पर  छपे  SAR को भी इग्नोर कर देते हैं। 

    मानक SAR क्या है ? और भारत में कितने मानक            SAR  को अपनाया गया है? हमारे शरीर के लिए                कितना SAR  सुरक्षित है? 

 वैसे  तो इसका  कोई वैश्विक मानक तय नहीं किया गया है  परंतु  अधिकांश  देश  FCC के मानक  को ही अपनाते हैं। भारत ने भी इसी मानक  को लागू किया हैै। 
बस अन्तर इतना है कि अगर किसी फ़ोन का SAR वैल्यू FCC द्वारा निर्धारित SAR स्केल अथवा वैल्यू से अगर थोड़ा सा भी ज्यादा होता है अर्थात रेडियो फ्रिक्वेंसी का  emission ज़रा सा भी  अधिक होता है तो वो फ़ोन अमेरिका में प्रतिबंधित हो जाता है l
लेकिन भारत के सन्दर्भ में ऐसा नहीं है, यहां निर्धारित SAR वैल्यू अर्थात FCC के तय मानक से अधिक SAR वैल्यू वाले फ़ोन भी धड़ल्ले से बिकते हैं। 

 FCC क्या है ? और उसने SAR वैल्यू कितना निर्धारित   किया है ? 

FCC का फुल फॉर्म   Federal Communications Commission है  यह अमेरिका की सूचना-प्रसारण मंत्रालय से जुड़ी संस्था है, जो एक नियामक का कार्य करती है  । 
FCC ने किसी भी स्मार्टफोन या मोबाइल के लिए SAR का मानक 1.6 watt/kg तय किया है। 
अगर कोई फ़ोन इससे ज्यादा रेडिएशन देता है अर्थात उसका SAR वैल्यू 1.6w/kg से थोड़ा भी ज्यादा होता है वो फ़ोन आपके लिए बहुत ही ज्यादा ख़तरनाक है। 
आप इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं - मान लीजिए अगर किसी मोबाइल फ़ोन का SAR 1.62w/kg भी है तो वो फ़ोन अमेरिका में नहीं बेचा जा सकता है। 


        SAR को लेकर कन्फ्यूजन क्यों? 

अब आपको लग रहा होगा कि 1.6w/kg SAR बहुत सुरक्षित है तो ये आपकी गलतफहमी है। 
ये  शरीर द्वारा  RF अवशोषण (Absorption) की अधिकतम सम्भव सीमा को दर्शाता है जिसपर आपके शरीर के टिशू और सेल्स कुछ हद तक सुरक्षित रहते हैं। 
1.6w/kg का तात्पर्य है कि हमारी शरीर के प्रति इकाई द्रव्यमान से 1.6 watt ऊर्जा (RF) अवशोषित हो रही है। 
इसलिए मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन से  बचाव आपकी प्राथमिकता में होना चाहिए। 

                कैसे चेक करें SAR? 

आप  USSD कोड   *#07# डायल करके अपने मोबाइल का SAR कर सकते हैं और अगर आपको पता चले कि आपके मोबाइल का SAR 1.6w/kg से ज्यादा है तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए अथवा आपको उस फोन को रिप्लेस कर देना चाहिए। 
जब आप ये कोड डायल करेंगे तो दो तरह का SAR दिखेगा - 
Head - w/kg 
Body-  w/kg  
अर्थात आपके सिर द्वारा अवशोषित रेडिएशन और आपके धड़ द्वारा अवशोषित रेडिएशन। 
दोनों 1.6w/kg के बराबर या कम होना चाहिए।

     WHO के गाइडलाइंस - (रेडिएशन से होने वाले ख़तरे और उससे बचाव ) 

WHO के अनुसार अगर हम 50 मिनट लगातार मोबाइल फ़ोन का प्रयोग करते हैं तो हमारे ब्रेन-सेल्स प्रभावित होना शुरू हो जाते हैं। उसमें सूक्ष्म परिवर्तन आना शुरू हो जाता है। तत्पश्चात इसके गंभीर परिणाम होते हैं। 
WHO माइक्रोवेव से बचने के लिए कहता है। हमें माइक्रोवेव में पके खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए। 
मोबाइल फोन जनित  रेडिएशन से बचने के उपाय - 

1- मोबाइल पर बात करते वक्त इयरफ़ोन या हेडफोन का      प्रयोग करें। 
2- ज़रूरी ना हो तो डाटा ऑफ करके रखें।
3- मोबाइल को सिर से अधिक से अधिक दूर रखने की          कोशिश करें। 
4- बच्चों को मोबाइल बिल्कुल ना दें  अगर आप बच्चों          का   हित चाहते हैं तो। 
5- सोते वक्त मोबाइल फ़्लाइट मोड पर करके शरीर से           दूर   रखें। 
6- कमरे में छोटे-छोटे प्लांट लगाएँ जो रेडिएशन को अवशोषित करने का काम करते हैं। 
7- मोबाइल पर रेडिएशन एबजाॅर्बर लगाएं। 
8- बातचीत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा टेक्स्ट मैसेज       को प्राथमिकता दें। 
भारत में बिकने वाले सबसे ज्यादा खतरनाक मोबाइल - 

  

 गौरतलब है कि चाइनीज़  कंपनियों के मोबाइल सबसे ज्यादा रेडिएशन छोड़ते हैं। 
अगर आप भी इस लिस्ट में दिए किसी मोबाइल का प्रयोग करते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए तुरंत। 


       Editor - Kaushik Dubey  
    
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