जापान पर परमाणु हमले की पूरी कहानी। द्वितीय विश्व युद्ध का अंत। हिरोशिमा और नागासाकी पर हमले की 75 वीं वर्षगांठ

6 अगस्त मानव-इतिहास का सबसे काला दिन : हिरोशिमा पर परमाणु बम से हमला

                                        एडिटर - कौशिक दुबे 

6 अगस्त 1945 के दिन ही 'मानवता के विनाश' की पृष्टभूमि लिखी गई थी, अगर 6 अगस्त को मानव-जाति के अंत की शुरुआत का प्रथम दिन कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 
6 अगस्त 1945 को दुनिया पहली बार 'वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन' अथवा  'परमाणु बम' और इसके विनाशकारी रूप से परिचित हुई थी। 

परमाणु बम के विकास की कहानी संक्षेप में ~

प्रथम विश्वयुद्ध के अंत के साथ ही द्वितीय-विश्वयुद्ध की पृष्टभूमि भी लिखी जा चुकी थी। 
जर्मनी पर निर्दयी और उकसाने वाली संधियाँ थोप दी गयी थीं जिसके कारण जर्मनी बदले की आग में जल रहा था। हिटलर के नेतृत्व में कट्टर राष्ट्रवाद की विचारधारा से ओतप्रोत जर्मनी नए और उन्नत हथियारों के आविष्कार और उत्पादन में दिनरात जुटा हुआ था तो मित्र-देश भी हथियारों की रेस में ज्यादा पीछे नहीं थे। 

इसी बीच 1938 में बर्लिन,जर्मनी के एक भौतिकी-प्रयोगशाला में एक अप्रत्याशित खोज कर ली गयी। 

भौतिक-शास्त्री ओट्टो हान, लिजे़ माइटनर और फ्रिट्ज़ स्ट्रॉसमैन ने प्रयोगशाला में 'नाभिकीय-विखंडन' की खोज की जिसकी वजह से 'परमाणु-बम' के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। 
इन भौतिकीविदों ने बताया कि "जब किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ के एटम को किसी हल्के एटम में विभाजित किया जाए तो भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।" 

  
  अमेरिका द्वारा मैनहटन प्रोजेक्ट की शुरुआत  

जर्मनी के जवाब में अमेरिका ने भी एक सेक्रेट प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया, इस प्रोजेक्ट का कोड-नेम था-
'मैनहटन प्रोजेक्ट'। 
अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 28 दिसम्बर, 1942 में जर्मनी के सम्भावित ख़तरे को देखते हुए किया था। इस प्रोजेक्ट का काम अमेरिकी रक्षा विभाग, सेना और वैज्ञानिकों को एक टेबल पर लाना था। 

इस प्रोजेक्ट की अध्यक्षता प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक J. Robert Oppenheimer कर रहे थे।  इन्हें  'परमाणु बम का जनक' भी कहा जाता है। 

16 जुलाई, 1945 को अमेरिका के न्यू मेक्सिको के रेगिस्तान में पहली बार परमाणु-बम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। विस्फ़ोट इतना भयानक था  कि 40,000  फीट ऊँचा मशरूम-क्लाउड बना जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। 
और इसी परीक्षण के बाद दुनिया  'परमाणु युग ' में प्रवेश करती है।

हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम से हमला : युद्ध में परमाणु बम का प्रथम बार प्रयोग 

   परमाणु बम  'लिटिल बॉय ' जहाज में लोड होते हुए 


द्वितीय विश्व युद्ध का प्रारंभ 1 सितंबर 1939 को जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण करने के साथ हुआ।
जर्मनी, इटली और जापान एक खेमे में और दूसरे खेमे में मित्र-राष्ट्र ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका और सोवियत यूनियन थे। 

अप्रैल 1945 में ही यूरोप में युद्ध पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था लेकिन अमेरिका और जापान एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वन्द्वी बन कर उभरे। 
नतीजतन, प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और जापान के बीच युद्ध अभी भी चल रहा था। 

अमेरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने जापान से आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, समर्पण ना करने की स्थिति में मास-डिस्ट्रक्शन की धमकी दी। 
वहीं जापान अभी तक इस बात से अंजान था कि अमेरीका ने परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं और दूसरी बात परमाणु हमले के बाद होने वाले विनाश में भी संशय था। अतः जापान ने आत्मसमर्पण करने से मना कर दिया। 

प्रोजेक्ट मैनहटन के अंतर्गत वैज्ञानिकों और सेना ने मिलकर 2 भिन्न प्रकार के परमाणु हथियार बनाए थे - 
एक, यूरेनियम आधारित 15 किलो टी एन टी का परमाणु बम जिसको  'लिटिल बॉय' नाम दिया गया था। 
दूसरा, प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम जिसको 'फैट मैन' नाम दिया गया था। 



6 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने अपने B-29 बॉम्बर से 15 किलो टी एन टी के परमाणु बम 'लिटिल बॉय' को जापान के 'हिरोशिमा' शहर पर गिराया। जिसकी वजह से 8 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में सब कुछ जल कर राख हो गया, पानी भांप बन कर उड़ गया। 90000 लोग तत्काल मारे गए और  कुछ ही महीनों में रेडिएशन से और जलने की वजह से  50000 से ज्यादा लोग मारे गए। 

जापान के सम्राट का आत्मसमर्पण करने से इंकार 

जापान के सम्राट ने अब भी आत्मसमर्पण करने से मना कर दिया। हिरोशिमा हमले के सिर्फ 3 दिन बाद 9 अगस्त को अमेरीका ने प्लूटोनियम-आधारित 22 किलोटन टी एन टी का एक और परमाणु बम जापानी शहर 'नागासाकी' पर गिराया... इस हमले में 
40 हज़ार लोग कुछ ही मिनटों में मर गए और लगभग 41000 लोग 4 महीनों के अंदर रेडिएशन, जलने से, अंग-भंग होने की वजह से मारे गए। 

नागासाकी नहीं  'कोकूरा' था प्रारंभिक लक्ष्य  

हालाँकि 9 अगस्त को 'नागासाकी' प्राईमरी टार्गेट नहीं था, अमेरीका ने हिरोशिमा में मौत का खेल खेलने के बाद जापान के एक घने आबादी वाले शहर 'कोकुरा' को अपना लक्ष्य बनाया था लेकिन उस दिन कोकूरा शहर के ऊपर बादलों की एक मोटी परत थी जिससे कुछ भी दिख नहीं रहा था.. B-29 बॉम्बर बहुत देर तक कोकूरा के आसमान में उड़ता रहा परंतु काफ़ी देर तक उड़ते रहने के बाद भी जब मौसम साफ नहीं हुआ तो अमेरिका ने प्लान-B पर अमल किया और अमेरीकी हाईकमान ने 'नागासाकी' पर हमले का आदेश दिया, बस कुछ ही मिनटों में नागासाकी राख में तब्दील हो गया। 

नागासाकी पर हमले के तत्काल बाद जापानी सम्राट ने आत्मसमर्पण करने की घोषणा कर दी और इसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध का पटाक्षेप हो गया। 

  नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु हमले का प्रभाव 

जेनेटिक्स सोसाइटी ऑफ अमेरिका 2016 के अध्ययन में सामने आया कि जो लोग परमाणु हमलों में बच गए थे उनमें विकिरण के दीर्घकालिक प्रभाव का असर साफ दिखता है।  जो लोग बच गए थे उनमें और उनकी अगली पीढ़ी में कैंसर का दर सबसे ज्यादा है। बच्चों में अनुवांशिक रोगों और जन्म से शारीरिक और मानसिक अक्षमता की दर भी सबसे अधिक है। 


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